दमोह जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पेट्रोल पंप से 4,000 लीटर से अधिक का अवैध स्टॉक जब्त किया है।

आर्टिकल 19 न्यूज दमोह

अशोक कुमार अहिरवार

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पेट्रोल पंप से 4,000 लीटर से अधिक का अवैध स्टॉक जब्त किया है। जिला कलेक्टर (जिला मजिस्ट्रेट) प्रताप नारायण यादव ने खुद इस मामले की पुष्टि की है।
इस पूरी कार्रवाई और प्रशासन के आगामी कदमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

डेटा एनालिसिस से खुला राज

कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन द्वारा पिछले महीनों में जिले के सभी पेट्रोल पंपों के बिक्री आंकड़ों का गहन विश्लेषण (Data Analysis) किया जा रहा था। इस दौरान 20 पेट्रोल पंप ऐसे मिले, जहां अचानक बिक्री में बहुत तेजी से उछाल (Growth) देखा गया। जब पूरे जिले में बिक्री सामान्य या कम थी, तब इन चुनिंदा पंपों पर भारी बिक्री ने प्रशासन का संदेह बढ़ा दिया।

एक साथ 20 टीमों ने की छापेमारी

संदेह पुख्ता होने पर प्रशासन ने एक ही समय पर सभी 20 पेट्रोल पंपों पर 20 अलग-अलग टीमें बनाकर औचक निरीक्षण (Inspection) कराया।

  • 4,000 लीटर अवैध स्टॉक जब्त: जांच में एक पेट्रोल पंप पर तय रिकॉर्ड से 4,000 लीटर से अधिक की मात्रा पाई गई। पंप संचालकों द्वारा बिक्री को गलत दर्शाकर हेराफेरी या किसी गलत उद्देश्य के लिए इस स्टॉक को छिपाकर रखा गया था। प्रशासन ने इसे तुरंत जब्त कर राजसात (Seize) करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
  • कम स्टॉक वाले पंपों पर भी एक्शन: जिन अन्य पंपों पर स्टॉक कम पाया गया है, उनके खिलाफ संबंधित तेल कंपनियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की जा रही है।

किसानों के लिए बड़ी राहत: केन (Can) में मिलेगा डीजल

इस खबर के साथ ही जिला कलेक्टर ने क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। पहले नियमों के तहत केन या बर्तनों में डीजल देने पर पूरी तरह प्रतिबंध था, लेकिन अब किसानों की कृषि आवश्यकताओं को देखते हुए इसमें ढील दी गई है।

“किसान भाई अब अपने ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों के लिए प्रतिदिन 200 लीटर तक डीजल केन (Can) में ले सकेंगे।” >

प्रताप नारायण यादव, जिला कलेक्टर (दमोह)

पंप मालिकों को सख्त चेतावनी

प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों और मालिकों से नियमों का कड़ाई से पालन करने का अनुरोध किया है। कलेक्टर ने साफ किया कि किसानों के लिए दी गई इस छूट का सही तरीके से पालन होना चाहिए ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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