आर्टिकल 19 न्यूज : दमोह



चीफ एडीटर : अशोक कुमार अहिरवार
फर्जीवाड़ा : पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के बाद तीन आरोपियों को लिया हिरासत में, पूछताछ जारी
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टरों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
पुलिस के अनुसार 6 मई को सीएमएचओ कार्यालय से कोतवाली थाना पुलिस को एक जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया कि ग्वालियर निवासी कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी राजपाल गौर ने संजीवनी क्लिनिक सुभाष कॉलोनी दमोह में नियुक्ति पाने के लिए फर्जी एवं कूटरचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी करीब एक साल से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस को आशंका है कि यह सिर्फ तीन लोगों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि फर्जी डिग्री और नियुक्तियों का बड़ा नेटवर्क प्रदेश स्तर तक फैला हो सकता है।
पुलिस ने दर्ज किए अलग-अलग मामले
पुलिस द्वारा की गई दस्तावेजों की जांच के दौरान कई तथ्य संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन में दोनों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
पूछताछ में तीसरे आरोपी का हुआ खुलासा
आरोपी यादव और गौर से हुई पूछताछ में जबलपुर में कार्यरत अजय मौर्य का नाम भी सामने आया। पुलिस को जानकारी मिली कि वह भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संजीवनी अस्पताल में कार्यरत था। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे भी हिरासत में ले लिया। पुलिस अब तीनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उन्हें फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए।
पैसों के बदले बनाए जा रहे थे फर्जी डॉक्टर
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक पैसों के बदले फर्जी एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी अस्पतालों में नियुक्तियां दिलाई जा रही थीं। पूछताछ में कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि भोपाल स्तर तक कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 378(3), 338, 336(3) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनकर सरकारी अस्पतालों में कर रहे थे बेखौफ इलाज
फर्जीवाड़ा : पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के बाद तीन आरोपियों को लिया हिरासत में, पूछताछ जारी
दमोह /
स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी कर रहे तीन कथित डॉक्टरों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
पुलिस के अनुसार 6 मई को सीएमएचओ कार्यालय से कोतवाली थाना पुलिस को एक जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया कि ग्वालियर निवासी कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी राजपाल गौर ने संजीवनी क्लिनिक सुभाष कॉलोनी दमोह में नियुक्ति पाने के लिए फर्जी एवं कूटरचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी करीब एक साल से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे थे। पुलिस को आशंका है कि यह सिर्फ तीन लोगों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि फर्जी डिग्री और नियुक्तियों का बड़ा नेटवर्क प्रदेश स्तर तक फैला हो सकता है।
पुलिस ने दर्ज किए अलग-अलग मामले
पुलिस द्वारा की गई दस्तावेजों की जांच के दौरान कई तथ्य संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। पूछताछ और दस्तावेज सत्यापन में दोनों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए।
पूछताछ में तीसरे आरोपी का हुआ खुलासा
आरोपी यादव और गौर से हुई पूछताछ में जबलपुर में कार्यरत अजय मौर्य का नाम भी सामने आया। पुलिस को जानकारी मिली कि वह भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संजीवनी अस्पताल में कार्यरत था। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे भी हिरासत में ले लिया। पुलिस अब तीनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उन्हें फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए।
पैसों के बदले बनाए जा रहे थे फर्जी डॉक्टर
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक पैसों के बदले फर्जी एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी अस्पतालों में नियुक्तियां दिलाई जा रही थीं। पूछताछ में कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस को आशंका है कि भोपाल स्तर तक कुछ संस्थाओं और व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध हो सकती है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 378(3), 338, 336(3) और 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
