कृषि पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी संसदीय समिति का श्रीनगर दौरा: कृषि मूल्य श्रृंखला और मत्स्य पालन विकास पर हुई विस्तृत अनौपचारिक चर्चा

आर्टिकल 19 न्यूज

अशोक कुमार

दमोह:कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण संबंधी संसदीय समिति के अध्ययन दौरे के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में उच्च स्तरीय बैठकों और अनौपचारिक चर्चाओं का दौर जारी रहा। श्रीनगर स्थित होटल रेडिसन में आयोजित इस दिवसीय कार्यक्रम में देश के कृषि परिदृश्य को बदलने और नीली क्रांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो बेहद महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

इस अनौपचारिक चर्चा में भारत सरकार के मंत्रालयों, अग्रणी वित्तीय संस्थानों, स्वायत्त निकायों और जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भाग लिया।1. सत्र: “भारत की कृषि मूल्य श्रृंखला की क्षमता को उजागर करना”दौरे के द्वितीय दिवस के पहले सत्र में भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय दोगुनी करने के रोडमैप पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस चर्चा में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर रणनीतियां साझा की गईं:

मंत्रालयों और विभागों की सहभागिता:

इस सत्र में कृषि और किसान कल्याण विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।संस्थागत सहयोग: कृषि क्षेत्र के विकास की रीढ़ माने जाने वाले संस्थानों जैसे नाबार्ड (NABARD), एनसीडीसी (NCDC) और एपिडा (APEDA) के प्रतिनिधियों ने मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करने पर अपने विचार रखे।

मुख्य फोकस:

फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बुनियादी ढांचे (Cold Storage और Warehousing) का विकास।कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा देना ताकि वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़े।किसानों को सीधे बाजार और निर्यात के अवसरों से जोड़ना।

2. सत्र: “अंतर्देशीय जल कृषि और जलाशय मत्स्यपालन का विकास”उपविषय: मीठे पानी में जल कृषि और क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा देनादूसरा सत्र जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य अंतर्देशीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को खंगालने पर केंद्रित रहा। ठंडे और मीठे पानी के संसाधनों से समृद्ध जम्मू-कश्मीर के लिए यह विषय अत्यंत प्रासंगिक रहा।

विशेषज्ञ संस्थानों की उपस्थिति:

इस तकनीकी और रणनीतिक चर्चा में राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB), आईसीएआर-केंद्रीय शीत जल मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-DCFR) के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया।

वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग: वित्तीय समावेशन के लिए नाबार्ड और एसएलबीसी (State Level Bankers’ Committee) जम्मू और कश्मीर के प्रतिनिधि मौजूद रहे। साथ ही संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

मुख्य फोकस:

क्लस्टर आधारित विकास:

मत्स्य पालन को एक व्यवस्थित उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए क्लस्टर (समूह) मॉडल को बढ़ावा देना, जिससे छोटे मछुआरों को तकनीकी और विपणन सहायता आसानी से मिल सके।मीठे पानी और शीत जल मात्स्यिकी: जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ‘ट्राउट’ (Trout) जैसी मूल्यवान मछलियों के उत्पादन और मीठे पानी में जल कृषि (Aquaculture) के आधुनिकीकरण पर जोर।

क्रेडिट लिंकेज:

एसएलबीसी और नाबार्ड के माध्यम से मछुआरों को आसान ऋण और ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) की सुविधाएं सुनिश्चित करना।समिति के दौरे का महत्वसंसदीय समिति का यह अध्ययन दौरा नीति निर्माताओं, जमीनी स्तर के कार्यान्वयनकर्ताओं और वित्तीय संस्थानों को एक मंच पर लाने में बेहद सफल रहा है।

चर्चा के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि जम्मू-कश्मीर में कृषि-प्रसंस्करण और शीत जल मत्स्य पालन में रोजगार और स्वरोजगार पैदा करने की अभूतपूर्व क्षमता है।समिति के सदस्यों ने सभी हितधारकों के सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और इन विचारों को आगामी नीतियों व रणनीतियों में शामिल करने का आश्वासन दिया, जिससे न केवल क्षेत्र के किसानों और मछुआरों को लाभ होगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

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